October 10, 2010

गजल

अब  तलक  जो सपना  रहा ,  काश  वो  सच  होता  सनम


उम्रभर  को  ना  सहीं  ,  पल  दो  पल  के  ही लिए
मैं तेरी जुल्फों के नीचे ,  चैन  से   सोता   सनम

दिल में हूँ कब से दबाये , दर्द  का  इक  जलजला
चाहूँ  लग  तेरे  गले  से , फुटकर   रोता  सनम

सोंचा था आबाद  होंगे , हम  तुम्हारे  इश्क  से
तुने  सबकुछ  ले लिया , पास मेरे जो था सनम

तू अगर लौटा जो देता , दिल मेरा बस एकबार   
फिर कभी मैं राहेवफा में , दिल नहीं खोता सनम

कसमें वादे याद आते , तुझको भी जब बेपनाह                                 
तू भी अपने पाप दिल के , आंसूओ से धोता सनम

मार के मेरी शख्सियत को , तू बना है बेगुनाह
फिर  रहा  हूँ  दरबदर मैं , लाश को ढ़ोता सनम

October 9, 2010

दोस्ती

हैं मिलते रहे हाथ से हाथ अब तक ,
                                              कभी दिल से दिल भी मिला करके देखो
नहीं गर मुहब्बत हो मुझसे ओ यारा ,
                                              तो शिकवे शिकायत  गिला करके  देखो
है बनते हुए को तो  सब  ने  बनाया ,
                                             कभी  काम  बिगड़ा  बना   करके  देखो
भागा करोगे  तबाही  से  कब  तक ,
                                             कभी  जश्ने गम भी  मना  करके  देखो
दिलाउँ  तुम्हें किस तरह मैं भरोसा ,
                                             भरम अपने दिल का दफा  करके  देखो
अभी तक तो अपने लिए ही जिए तुम ,
                                            कभी  मेरी खातिर  वफा   करके    देखो
मिलेंगे  कभी  तो  किसी राह पर  हम ,
                                            हँसी   सपने   ऐसे   सजा   करके   देखो
दफन है जो दिल में वो यादों का मौसम ,
                                           जो  तन्हा  रहो  तो  जगा   करके   देखो
छोडो  भी  अब  तुम  बहाने  बनाना ,
                                           नहीं  आ  सको   तो  बुला   करके  देखो
खिलातें  रहें फूल गमले में अब तक ,
                                          कभी  फूल  दिल  में  खिला  करके  देखो
तुम्हें हो रही फिक्र क्यूँ  बेवजह  की ,
                                          मेरी   दोस्ती   आजमां    करके      देखो
नहीं  दिल्लगी है ये  ओरों के  जैसी ,
                                          है  सोना खड़ा  ये   तपा   करके      देखो

October 8, 2010

उलझन

मैं  भी  रोया  तू भी रोई , पर  रोने  से क्या होता है
मैं  तेरा  हूँ  तू  मेरी  है  , जुदा  होने से  क्या होता हैं

है कौन भला इस दुनिया में , जिसको न कोई गम होता है
जाने से दूर सनम से भी , ये प्यार कहाँ कम होता है

जकड़े जाते हैं तन लेकिन , मन बांध कहाँ कोई पाता है
जब आँख देखती है सपने , मन का पंछी उड़ जाता है

दुनिया को नही मंजूर है ये , कोई प्यार भरा अफसाना हो
चाहे जितने भी हो दुश्मन , पर ना कोई दीवाना हो

मिलती हैं सजाएं उल्फत में , पत्थर बरसाए जाते हैं
ऐ यारा कर्ज मुहब्त में , ऐसे ही चुकाए  जाते है

फिर उठेंगी ऊँची दिवारे , लाखों फतवे जारी होंगे
जिसे देख कयामत रोएगी , वो सितम ऐसे भारी होंगे

ममता देने वाली आँचल , बिल्कुल छोटी पर जायगी
खुशियाँ देने वाली आँखे , गम आँखों में भर जायगी

टूटेंगे जब दो दिल तबही, इस दुनिया को राहत होगी
महफिल में नफरतवालों के , फिर से रुसवा चाहत होगी

इस प्रेम डगर में दीवानी  ,  इक मंजिल है दो राहें है
उस ओर जमाने की रौनक , इस ओर दर्द और आहें है 

काँटों से भरे इन राहों पे , चल पाना बड़ा मुश्किल होगा
दम निकलेगा अरमानों का , छलनी-छलनी ये दिल होगा  

 ऐसा ना हो आगे बढके , फिर से पीछे मुडजाना  हो
चलने से पहले सोंच जरा , ना की पीछे पछताना हो

अच्छा होगा तू सुलझाले ,अपनी उमीदों की उलझन 
ऐसा ना हो तेरे कारण  , जख्मी हो मेरा दिवानापन

ये सौदा दिलों का होता है , ये खेल बड़ा ही मुश्किल है
तेरे पास जमाने की दौलत , मेरे पास तो बस मेरा दिल है

हर गम दुनिया के सह लेगा , ये गम ना दिल सह पायेगा
मैं रोक न पाउंगा दिल को , दर्दे गम में बह  जायगा

इस दम ही मुझको भूल के तू , कोई ढूंढ़ ले नये बहाने को
या तो दे वफाओं की रौनक , या मार दे फिर दीवाने को

क्या खोना है क्या पाना है , जो करना है इस दम कर ले
अपनाले या फिर ठुकरादे , अपनी उलझन  को कम कर ले

October 6, 2010

तो हम क्या करें - ''गजल ''

बनते- बनते रह गई जो , बात तो हम क्या करें
दे  सके ना  उम्रभर  वो  , साथ तो हम क्या करें

कर गये थे मिलने  का , वादा सनम मुझसे मगर
 रह गई आधी  अगर  , मुलाकात तो हम क्या करें

जल गया जो हसरतों की , आग में ये तन बदन
आये उसके  बाद जो  ,  बरसात तो हम क्या करें'

 आरजू  हमने भी की थी , रौशनी के  साये  की
आ  गई  काली  अँधेरी  ,  रात तो हम क्या करें

हाथों  में मेंहदी  रचाए , रह  गये हम  देखते
वो न  आया ले के  जो , बारात तो हम क्या करें

जश्न होता महफिल होती , गूंजती शहनाइयां
दे गया पर यार गम  ,  सौगात तो हम क्या करें

ये इश्क क्या है - "गजल"

ये आँखें क्या है इक आईना हैं
                                      है इसमें तस्वीर सनम की
ये इश्क क्या है इक जलजला है
                                    आगाज है आनेवाले  गम की
ये जख्म क्या है इक तोहफा है
                                   निशानियाँ हैं उनके करम की
ये दर्द क्या है चिंगारियां है
                                  ये है जलन किस्मत के सितम की
जूनून क्या है नादानियाँ है                                                                              
                                  आहट है बर्बादियों के कदम की
ये खाब क्या है इक आसरा है
                                 ये है झरोंखा मन के भरम की

शायरी

ये गम नहीं की गैरों ने कस्ती है डुबोई
हैं गम मुझे अपने खड़े तमाशबीन  थे
रह-रह के मुझको दर्द ये बेचैन करता हैं                                                           
मेरे खाब से भी ज्यादा उसके सच हसीन थे

ऐ हंसी तू सब हसीनों से जुदा लगती है
मेरी इबादत मुझे तू मेरा खुदा लगती है
मैं हूँ बीमारे दिल तेरी  मुहब्बत  में
तू मुझे मेरे दर्दे दिल की दवा लगता है

तेरी जुल्फों की घटा में मुझे खोने तो दे
हैं तेरा प्यार समंदर ये दिल डुबोने तो दे
अगर तू दे नहीं सकता मुझे कुछ भी ऐ सनम
अपने कांधे पे रखके सर मुझे रोने तो दे

कभी जिन्दगी में ऐसे भी मोड़ आते हैं
अपने साये भी अपना साथ छोड़ जाते हैं
कुछ को खुदा की रहमत उबार लेती  हैं
कुछ को ये वक्त के तूफान तोड़ जाते हैं

खुदा का वास्ता मुझको मेरे सनम मत दे
जिसे निभा न सकूं मैं ऐसी  कसम  मत दे
न दे सके तू ख़ुशी जो तो कोइ बात  नही
कर रहम इतना सा मुझपे की अपने गम मत दे

October 5, 2010

मुझको भूल न पाओगे

ठंढी हवा जब डोलेगी , कोयल कुहू बोलेगी
यादों में खो जाओगे , मुझको भूल न पाओगे

साथ कभी जब हम तुम थे , खुशियों की धुन में गुम थे
कैसे  वो  बिसराओगे ,  मुझको  भूल  न  पाओगे 

आँखें गम से नम होंगे , फिर भी दर्द न कम होंगे
अपने  पे  पछताओगे ,  मुझको भूल  न पाओगे

आह उठेगी सीने में  ,  मुश्किल होगी जीने में
चाहे कहीं भी जाओगे , मुझको भूल न पाओगे

 सहलाओगे दिल अपना , जोड़ोगे टूटा सपना
ऐसे  जी  बहलाओगे   ,    मुझको भूल  न पाओगे

तड़पोगे मुझे पाने को , फिर से प्यार जताने को
सपने नये सजाओगे  , मुझको भूल  न पाओगे

किस्मत में ही रोना था , हुआ वही जो होना था
यूँ खुद को समझाओगे , मुझको भूल  न पाओगे

दिल के कोने कोने में , यादें मेरी संजोने  में
सारी उमर बिताओगे , मुझको भूल  न पाओगे

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