ग़मों के पार अगर जाना हो , अपने जख्मों को हरा रखना
गर ख्वाहिश हो आसमां की तो , उम्मींदो का बाग़ भरा रखना...
ज़िन्दगी की उमस भरी दोपहरी में , कुछ खुशनुमा आवोहवा रखना
दर्द और बढ़ाएंगे ये दुनियावालें , पास में दर्दें दिल की दवा रखना...
जहर घोलतें हैं लोग मीठी बातों से , ऐसे लोगों से खुद को जुदा रखना
हो जुदाई ही मयस्सर कहीं जो उल्फत में , यार को मान के दिल में खुदा रखना...
हौंसलो की भी आजमाइश हुआ करती हैं , अपने पाओं को धरती में जमा रखना
पावों के नीचे से छीन ले जमीं दुनिया , इससे पहले बचा के कुछ आसमां रखन...
कहीं कुतर न दें वो पंख फरफराए तो , अपने अरमानों को दिल में दबा रखना
छिन न लें कहीं वो खुश होने की वजह , अपने आखों में ही सपनों का पता रखना...
मिले न प्यार जमाने का कोई बात नहीं , अपना प्यार अपने वास्ते बचा रखना
न होने पाए कभी विरान ये दिल की दुनिया , हर कोने में जला के शमां रखन...
नव भारती सेवा ट्रस्ट की स्थापना का मुख्य उद्देश्य है महिलाओं का सशक्तिकरण। बदलते वक्त के साथ महिलाओं को भी अपनी परिधि का विस्तार करना होगा, यही समय की मांग है। समाज मे उपेक्षित रूप से जी रहीं महिलाओं को हम उनके ताक़त का भान कराकर उन्हें अपने सम्मानित रूप से जीने का अधिकार प्राप्त करने में सहायता प्रदान करते है|
October 3, 2010
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ये आँखें क्या है इक आईना हैं है इसमें तस्वीर सनम की ये इश्क क्या है इक जलजला है ...
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अभी खुलके इनसे मिल भी न पाए , की ये जा चुके हैं और वो आ गया है जुदाई का दिल गम माना भी न पाया , घटा बन गगन में खुशी छा गया है ये माना कि ...
2 comments:
excellently depicted
excellent poem
its a real truth about life
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