नव भारती सेवा ट्रस्ट की स्थापना का मुख्य उद्देश्य है महिलाओं का सशक्तिकरण। बदलते वक्त के साथ महिलाओं को भी अपनी परिधि का विस्तार करना होगा, यही समय की मांग है। समाज मे उपेक्षित रूप से जी रहीं महिलाओं को हम उनके ताक़त का भान कराकर उन्हें अपने सम्मानित रूप से जीने का अधिकार प्राप्त करने में सहायता प्रदान करते है|
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मैं भी रोया तू भी रोई , पर रोने से क्या होता है मैं तेरा हूँ तू मेरी है , जुदा होने से क्या होता हैं है कौन भला इस दुनिया मे...
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ग़मों के पार अगर जाना हो , अपने जख्मों को हरा रखना गर ख्वाहिश हो आसमां की तो , उम्मींदो का बाग़ भरा रखना... ज़िन्दगी की उमस भरी दोपहरी ...
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मैं भी भली हूँ और तू भी भला है , फिर क्यूँ कह रहे हो जमाना बुरा है जो हम तुम निभाते रहे कसमें -वादे , क्यों हो बेवफाई ये...
1 comment:
hi... suman your poem's best n your thinking is good i think that this lyrics is best for everyone .............ravi
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